Wednesday, March 13, 2019

एक पेंटिंग जिसमें छिपी क़त्ल की साज़िश की दास्तां

1669 में रेम्ब्रेंट वॉन रिन की 63 साल की आयु में जब मृत्यु हुई तो उन्हें चर्च के एक प्लॉट में दफ़ना दिया गया. उन दिनों ग़रीब लोगों की मौत के 20 साल बाद उनकी अस्थियों को खोदकर निकाल लिया जाता था और फेंक दिया जाता था.

रेम्ब्रेंट के साथ भी ऐसा ही हुआ लेकिन 1909 में आख़िरकार वेस्टरकर्क यानी एम्स्टर्डम की डच रिफॉर्म्ड चर्च की उत्तरी दीवार में उनके नाम का एक स्मारक पत्थर उस स्थान पर जड़ दिया गया जहां उन्हें दफ़न किया गया था. यह आज भी मौजूद है.

निजी जीवन में रेम्ब्रेंट अपनी पत्नी सास्किया से पैदा हुए सभी संतानों से ज़्यादा जिए. एम्स्टर्डम की एक कंपनी के लिए की गई बड़ी चित्रकारी 'द नाइटवॉच' जिस वर्ष पूरी हुई, उसी साल सास्किया की मौत हुई.

रेम्ब्रेंट के सभी बच्चों में टीटस ही वयस्क उम्र तक जी पाया. लेकिन रेम्ब्रेंट से पहले ही उसकी भी मृत्यु प्लेग से हो गई. यह झटका अपने जीवन के आख़िरी दो दशकों में वित्तीय परेशानी से जूझ रहे रेम्ब्रेंट के लिए बहुत बड़ा था.

1656 में अब का रेम्ब्रेंट हाउस म्यूज़ियम इस चित्रकार का आलीशान घर हुआ करता था. इसी साल आर्थिक संकटों से उबरने के लिए रेम्ब्रेंट को इसे बेचना पड़ा था. उस वक़्त टीटस और हेन्ड्रीक ने उनकी आर्थिक मदद की थी. हेन्ड्रीक को रेम्ब्रेंट ने नौकरानी के तौर पर घर में रखा था. उसी वर्ष उनकी सभी कलाकृतियों की नीलामी करनी पड़ी.

इस वर्ष रेम्ब्रेंट की मृत्यु की 350वीं बरसी मनाई जा रही है और इस अवसर पर दुनियाभर में उनकी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई है. अपने समय के इस सबसे महान चित्रकार को आख़िर ग़ुरबत ने कैसे घेर लिया?

कई वर्षों तक रेम्ब्रेंट की इस दुर्दशा को उनकी चित्रकारी 'द नाइटवॉच' से जोड़कर देखा गया.

फ़िल्म निर्देशक पीटर ग्रीनअवे के कारण इस चित्रकारी ने कई षड्यंत्रों को भी जन्म दिया. 2007 में आई उनकी फ़िल्म नाइट वॉचिंग और उसके बाद आई डॉक्यूमेंट्री रेम्ब्रेंट्स जे'क्यूज़ में यह विचार रखा गया है कि चित्रकारी में एक हत्या के षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश किया गया है. इसमें ऐसा लगता है जैसे रेम्ब्रेंट की ज़िन्दगी को ख़तरा हो जिससे बाद में उनका जीवन बर्बाद हो गया.

1936 में एलेक्ज़ेंडर कोरदा की फ़िल्म रेम्ब्रेंट की पेंटिंग में भी कुछ ऐसा ही दिखाया गया था. हर्षोल्लास के साथ जब द नाइट वॉच से पर्दा उठाया गया तो नागरिक सेना के सदस्यों और उनकी पत्नियों की चुप्पी की जगह अचानक ही पत्नियों की हंसी ने ले ली. उसके बाद सैनिकों का गुस्सा फूट पड़ा.

चार्ल्स लॉटन की रेम्ब्रेंट फिल्म में जब रेम्ब्रेंट ने अपने संरक्षक और मित्र जैन सिक्स से चित्रकारी के बारे में ईमानदारी से बताने के लिए कहा तो उसने बड़ी बेताबी से कहा कि इसमें मुझे परछाइयों, अंधेरे और भ्रांति के सिवा कुछ नहीं दिखता.

इसे गंभीर कला के रूप में नहीं लिया जा सकता. मज़े की बात यह है कि जैन सिक्स भी रेम्ब्रेंट के एक महान चित्र का विषय थे. कुछ पलों बाद ही कैप्टन बैनिंग कॉक, जिन्हें चित्र में अपने लेफ्टिनेंट के साथ सुनहरी आभा में दर्शाया गया है, उन्होंने रेम्ब्रेंट के काम को बहुत ही घटिया बताया.

लेकिन ऐसा लगता है कि बैनिंग कॉक ने ही गेरिट लुन्डेंस नामक डच चित्रकार से इसी का एक छोटा रूप तैयार करने को कहा था जो अब लंदन की नेशनल गैलरी में है.

रेम्ब्रेंट की चित्रकारी की यह नकल मूल चित्र के कुछ ही वर्षों के भीतर की गई थी. लुन्डेंस के चित्र से हमें पता लगता है कि रेम्ब्रेंट की यह कलाकृति कैसी दिखती होगी.

दरअसल 1715 में रेम्ब्रेंट के चित्र को ऊपर और बाईं ओर से दो-दो फ़ुट तथा नीचे और दाईं ओर से कुछ इंच काट दिया गया था.

इससे चित्र का मूल रूप बिगड़ गया था और पहले किनारे खड़े बैनिंग कॉक और उनका सहयोगी अब चित्र के ठीक बीच में हो गए थे. इससे चित्र में आगे बढ़ने वाली मूल भावना कुछ खो गई थी.

आज के ज़माने में ऐसा करना अपराध होता लेकिन तब के दिनों में ये होता रहता था. इस चित्र के साथ यह काम उस समय हुआ जब इसे नागरिक सेना कंपनी की बैठक वाले कमरे से हटाकर एम्स्टर्डम सिटी हॉल में नियत स्थान पर लगाया जा रहा था. 1885 में इसे इसकी नई जगह रिज़्स्क म्यूज़ियम में लगा दिया गया जहां इसके लिए विशेष गैलरी का निर्माण किया गया.

एक झूठी कहानी

तो क्या द नाइट वॉच के कारण रेम्ब्रेंट का पतन हुआ? शायद हमें चित्र में किसी हत्या के षड्यंत्र के संकेतों के बजाय उस समय के डच गणराज्य में लोकप्रिय रही चित्रकारी की एक उपविधा के नियमों पर नज़र डालनी होगी जिससे रेम्ब्रेंट भटक गये थे.

ये नियम सिविक मिलिशिया पोट्रेट या गार्डरूम सीन में दिखाई देते हैं. इनसे हमें अंदाज़ा लग जाएगा कि क्या रेम्ब्रेंट के मशहूर चित्र से वो लोग नाराज़ हो गए थे जिन्होंने उनसे ये चित्र बनवाया था.

निश्चित रूप से यह रेम्ब्रेंट की अब तक की सभी कलाकृतियों में सबसे बड़ी थी और कांट-छांट के बावजूद यह अब भी 12 फ़ीट X 14 फ़ीट (3.65X4.26 मी.) की है. हालांकि इस चित्रकारी में शोरगुल भरा हुआ है लेकिन चित्र में वास्तविकता नहीं दिखाई देती, बल्कि एक खालीपन और विचित्रता नज़र आती है.

इसमें एक कुत्ता भौंक रहा है; ड्रम बजाने वाला अपना बड़ा ड्रम बजा रहा है, बाईं ओर एकदम किनारे पर पीछे देखता हुआ एक लड़का दौड़ते हुए बिगुल ले जा रहा है. एक रक्षक अपनी बन्दूक की नली से छेड़छाड़ कर रहा है, अच्छी तरह तैयार कैप्टन के पीछे एक अन्य रक्षक की बंदूक से गलती से गोली चल जाती है, जिससे निकलता धुआं उसके लेफ्टिनेंट की परयुक्त ऊंची टोपी से मिलकर एक अजीब दृश्य पैदा कर रहा है. दाहिनी ओर एक रक्षक अपनी बंदूक की नली को ध्यान से देख रहा है. उधर चित्र में कुछ लोग प्रमुख चरित्रों के पीछे धक्का-मुक्की में लगे हैं और बड़ी मुश्किल से दिखाई देते हैं.

बैनिंग कॉक के बाईं ओर ऊपर की तरफ़ दिखाने वाली आंख ख़ुद चित्रकार की है. जैसा कि बेल्जियम के चित्रकार वॉन आइक को पसंद था, रेम्ब्रेंट भी पूरे दृश्य में कहीं न कहीं अपने आप को छाप ज़रूर देते थे.

चित्र में चटक रंगों के सुनहरे कपड़ों में दिखने वाली और कमर में मरी हुई मुर्गी लटकाए लड़की इस चित्र का हिस्सा लग भी रही है और नहीं भी लग रही है. दरअसल, एक वास्तविक व्यक्ति दिखने से अधिक वह एक निशान या संकेत के रूप में दिख रही है और मुर्गी या यूं कहें कि उसके स्पष्ट दिखने वाले पंजे बैनिंग कॉक की क्लोवेनियर्स (या मस्केटीयर्स) नामक कंपनी का प्रतीक है.

Friday, February 15, 2019

جدار ترامب: بالخرائط كل ما يجب أن تعرفه عن الجدار الحدودي بين أمريكا والمكسيك

أدى الخلاف بشأن تمويل الجدار الحدودي الذي وعد بإقامته الرئيس الأمريكي دونالد ترامب للفصل بين حدود بلاده والمكسيك إلى أطول فترة إغلاق للجهاز الحكومي في تاريخ الولايات المتحدة.

ويقول ترامب إنه يلزم الحصول على تمويل قدره 5.7 مليار دولار لمواجهة "أزمة إنسانية وأمنية" في الحدود الجنوبية، محذرا من أن الإغلاق الحكومي قد يستمر إلى أن يحصل على الأموال.

ويصف الديمقراطيون الجدار بأنه إهدار لأموال دافعي الضرائب، متهمين إدارة ترامب بأنها تتحدث عن "أزمة مفتعلة".

وفيما يلي سبع خرائط توضيحية تهدف إلى شرح الجدار المقترح والوضع الحدودي بين الولايات المتحدة والمكسيك.

1. لم يقم ترامب ببناء الكثير من جداره
قبل تولي ترامب السلطة، كان يوجد 654 ميلا (أكثر من ألف كيلومتر) من الحواجز القائمة على طول الحدود الجنوبية، 354 ميلا من الحواجز لمنع المارة و300 ميل عبارة عن سياج حاجز لمنع المركبات.

ووعد ترامب خلال حملته الانتخابية لرئاسة البلاد ببناء جدار على طول الحدود الممتدة لألفي ميل.

ثم تحدث بعد ذلك موضحا أن البناء سيقام على نصف المسافة فقط، لأن التضاريس الطبيعة، كالجبال والأنهار، تساعد في تغطية المسافة المتبقية.

بيد أن ترامب عندما تولى السلطة، وعلى الرغم من استبدال بعض الحواجز الموجودة بالفعل، لم يبدأ بالبناء على أي امتداد للجدار.

وصدق الكونغرس حتى الآن على توفير 1.7 مليار دولار لتمويل 124 ميلا للحواجز الجديدة والبديلة منذ دخول ترامب البيت الأبيض.

كما بنيت حواجز بديلة أو بدأت عمليات بناء على طول 40 ميلا. ومن المتوقع بدء عمليات بناء حواجز بديلة على طول أكثر من 61 ميلا في عام 2019. وهو ما يعادل أقساما جديدا بنسبة 15 في المئة للهياكل المقامة حاليا.

ويبدأ أول بناء لأي امتداد للهياكل الحالية، والتي يمكن إطلاق تسمية حاجز جديد عليها، في فبراير/شباط المقبل في وادي ريو غراند في ولاية تكساس.

وسوف يغطي المشروعان مساحة بإجمالي طول 14 ميلا: حاجز يمتد ستة أميال وآخر يمتد ثمانية أميال أخرى.

وعلى الرغم من إصرار ترامب على بناء جدار على امتد الحدود بين البلدين، أشار مسح أجراه مركز "بيو" للبحوث الشهر الماضي إلى أن غالبية الأمريكيين، 58 في المئة، يعارضون الفكرة، فيما يدعمها 40 في المئة.

2. لا يعرف أحد كم هي كلفة البناء بالفعل
تفاوتت تقديرات مؤسسات رسمية وغير رسمية بشأن كلفة الجدار الخرساني بين 12 مليار دولار إلى 70 مليار دولار.

وأثارت الكلفة المبدئية التي حددها ترامب، وتراوحت قيمتها بين 8 مليارات دولار و 12 مليار دولار لبناء جدار يغطي نصف الشريط الحدودي، خلافا واسع النطاق.

وكان سياج بطول 650 ميلا قد بني خلال فترة حكم الرئيس الأمريكي السابق جورج دبليو بوش بكلفة 7 مليارات دولار، ولا يمكن وصفه بأنه يفي بوعود ترامب الرامية إلى بناء حاجز "طويل وقوي وجميل".

بيد أن ترامب يطلب حاليا 5.7 مليار دولار بالإضافة إلى مبلغ 1.7 مليار دولار مخصصة بالفعل للحواجز الجديدة والبديلة.

وكانت وزارة الأمن الداخلي قد قدرت سابقا كلفة جدار يقام على نصف المساحة الحدودية بنحو 25 مليار دولار، لكنها قالت حاليا إنها مازالت تبحث عن خيارات لتحديد الكلفة.

وتقول هيئة الجمارك وحماية الحدود الأمريكية إن متوسط كلفة الجدار تصل تقريبا إلى 6.5 مليون دولار للميل الواحد لبناء جدار حدودي جديد أو استبدال السياج القديم الموجود بالفعل.

3. ترامب أراد جدارا خرسانيا، ويتحدث الآن عن جدار فولاذي
تراجع ترامب عن رأيه بشأن مادة بناء الجدار.

كان ترامب قد وعد ببناء "جدار كبير وجميل" بين الولايات المتحدة والمكسيك، وكان ذلك بمثابة نداء حشد خلال حملته الانتخابية، وكان يتحدث في البداية عن جدار خرساني.

بيد أنه بدأ يتحدث، بعد انتخابه رئيسا للبلاد، عن حاجز فولاذي، يستطيع أفراد الأمن على الحدود الرؤية من خلاله.

وعندما كشفت إدارة ترامب، في أكتوبر/تشرين الأول 2017، عن ثمانية نماذج مبدئية لتصميم جدار بارتفاع 30 قدما، جاءت مزيجة بين الخرساني والمعدني.

ويتحدث ترامب، منذ ديسمبر/كانون الأول، عن كونه لا يرغب في بناء جدار خرساني على الإطلاق، بل يرغب بدلا من ذلك في بناء "صفائح فولاذية مصممة بطريقة فنية".

ونشر ترامب تغريدة قبل الإغلاق الحكومي تضمنت صورة تصميم "حاجز من صفائح الفولاذ" وقال إنها "فعالة جدا وجميلة في ذات الوقت".

وقال مسؤولون في هيئة الجمارك وحماية الحدود الأمريكية إنه لا يوجد أي من النماذج التي قدمتها إدارة ترامب، وخضعت لاختبار في 2017، تستوفي متطلبات العمل.

وأضافوا أنها لم تتح "بيانات قيمة" تساعد في اختيار عناصر التصميم في المستقبل.

4. تراجعت المخاوف من الحدود الجنوبية بمرور الوقت
قال ترامب في خطاب وطني بداية يناير/كانون الثاني الجاري إن ثمة حاجة لجدار يهدف إلى وقف "أزمة إنسانية وأمنية متزايدة على حدودنا الجنوبية"، بما في ذلك وقف تدفق "آلاف المهاجرين غير الشرعيين".

كما تحدث ترامب في سجال مع الزعيمة الديمقراطية في مجلس النواب، نانسي بيلوسي، وزعيم الأقلية في مجلس الشيوخ، تشارلز تشومر، عن "تدفق مواطنين إلى بلادنا".

بيد أن الأرقام تشير إلى تراجع العبور غير الشرعي للحدود منذ عام 2000.

كان 1.6 مليون شخص قد عبروا الحدود بطريقة غير شرعية في عام 2000، في حين لم يتجاوز العدد العام الماضي 400 ألف شخص.

وسجل العدد خلال عام 2017، العام الأول من تولي ترامب السلطة، أدنى تراجع له منذ عام 1971.

ويعارض أعضاء الكونغرس، الذين يمثلون منطقة الحدود الجنوبية، بناء الجدار الحدودي، ويقولون إنه لن يفضي إلى تحسين الأمن.

وقال الجمهوري، ويل هورد، ممثل أكبر مساحة للمنطقة الحدودية الجنوبية مقارنة بأي عضو آخر في الكونغرس :"أعتقد أن بناء هيكل خرساني على الشريط الحدودي يعد باهظ التكلفة وأقل فعالية بالنسبة للأمن في المنطقة الحدودية".

5. الاعتقالات وطلبات اللجوء سجلت ارتفاعا جديدا عامي 2017 و 2018
سجلت حالات الاعتقال بين عامي 2017 و 2018 في المنطقة الحدودية بين المكسيك والولايات المتحدة زيادة بنحو 100 ألف، كما سجلت طلبات اللجوء زيادة بنحو 16 ألفا، بزيادة نسبتها 43 في المئة.

Thursday, February 7, 2019

शादी के 10 साल बाद भी राज कुंद्रा को लेकर बेहद रोमांटिक हैं शिल्पा शेट्टी, लिखा ऐसा नोट

वैलेंटाइन वीक चल रहा है. बॉलीवुड के कपल इसे अपने-अपने अंदाज में सेलिब्रेट कर रहे हैं. प्रपोज डे के मौके पर एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी ने भी एक खूबसूरत सी फोटो शेयर की है. इस फोटो में वो अपने पति राज कुंद्रा के साथ नजर आ रही हैं. राज ने शिल्पा का हाथ भी थामा हुआ है. इस फोटो के साथ शिल्पा ने राज का प्रपोजल याद किया है. 

फोटो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- "Major throwback. ये फोटो 11 साल पुरानी है जब आपके मुझे प्रपोज किया था. मुझे आज भी याद है आपने ली ग्रैंड होटल पेरिस का पूरा बैंकेट हॉल बुक कर लिया था. और मुझे ये कहकर बुलाया ता कि अर्ली सपर करना है. जब मैं अंदर आई तो अपने घुटनों पर बैठ कर आपने मुझे रिंग के साथ सप्राइज किया था. साथ में म्यूजिक भी बज रहा था. Ufff!. वो प्रपोजल मेरे सपनों से परे थे. तब से अभी तक आप मेरे सपनों को पूरा कर रहे हैं."

"इस सीन को आपके डायरेक्टोरियल वेंचर 'तेरी याद' में रीक्रिएट होता देख मैं बहुत इमोशनल हो गई. बहुत सारी यादे हैं. कुकी आप मेरे वैलंटाइन हैं और हमेशा रहेंगे. आपको एक और सफलता के लिए बधाई."

बता दें कि शिल्पा ने अपनी पोस्ट में तेरी याद का वो सीन भी शेयर किया है, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी पोस्ट में किया है.

नवंबर 2009 में शिल्पा, राज कुंद्रा के साथ शादी के बंधन में बंधी थीं. उनका एक बेटा भी है. दोनों स्पेशल बॉन्डिंग शेयर करते हैं. अक्सर साथ में उकी फोटो सामने आती हैं. वर्क फ्रंट की बात करें तो शिल्पा इन दिनों डांसिंग रियलिटी शो को जज कर रही हैं. काफी समय से उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाई हुई है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील पर नए खुलासे के बाद फिर से मोदी सरकार पर हमला किया और अंग्रेजी अखबार का हवाला देते हुए कहा कि रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे का विरोध किया था. राहुल ने कहा कि पीएम ने सीधे तौर पर डील में हस्तक्षेप किया था. मोदी ने भारतीय वायुसेना के 30 हजार करोड़ का नुकसान कराया. पीएम ने चोरी कर पैसे अनिल अंबानी को दिए. उन्होंने एचएएल की जगह अनिल अंबानी की कंपनी को डील दिलवाई.

उन्होंने आगे कहा कि ये साबित हो गया कि चौकीदार चोर है. डील पर प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने झूठ बोला था. राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार ने झूठ बोला. ये रक्षा मंत्रालय और कॉरपोरेट के बीच की लड़ाई है.

पिछले दिनों पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात के दौरान राफेल डील पर बातचीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह उनसे मिले थे, लेकिन राफेल पर उनसे कोई बातचीत नहीं हुई थी.

प्रियंका गांधी के पति रावर्ट वाड्रा पर पिछले 2 दिन से मनी लॉन्ड्रिंग पर प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों की पूछताछ और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के सवाल पर राहुल ने कहा कि जितनी मर्जी हो उतनी जांच कराइए, हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री को राफेल मामले पर कुछ बोलना चाहिए.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी 2015 में उत्तर प्रदेश की सरकार से पार्क और मूर्तियों पर खर्च हुए सरकारी पैसे की जानकारी मांगी थी. उत्तर प्रदेश में पूर्व की समाजवादी पार्टी सरकार इस मुद्दे पर बसपा को घेरते रहे हैं.

Monday, January 28, 2019

मंडला के हर्षल टॉपर, दूसरे-तीसरे नंबर पर भोपाल की रचना और राजनंदिनी, टॉप-10 में छह छात्राएं

मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा-2018 का फाइनल रिजल्ट रविवार को जारी हो गया। इसमें 298 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। अंक सूची के आधार पर टॉप पर मंडला के हर्षल चौधरी रहे। उन्हें 1023 अंक मिले। इस बार टॉप-10 में 6 महिला अभ्यर्थियों ने जगह बनाई।

इनमें भोपाल की दो रचना शर्मा 976 अंक और राजनंदिनी शर्मा 975 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। आयोग आरक्षण व अन्य गणना के आधार पर चयन और मेरिट सूची एक-दो दिन में जारी करेगा। कुल 298 पदों के लिए 31 दिसंबर से 23 जनवरी तक इंटरव्यू हुए थे। इसमें 895 अभ्यर्थी शामिल हुए।

एमपी पीएससी राज्य सेवा मुख्य परीक्षा पिछले साल जुलाई माह में हुई थी। अलग-अलग वजह से  परीक्षा से पहले 365 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया था। ये वे छात्र हैं जो रिजल्ट में आपत्ति के बाद हुए बदलाव के चलते कट ऑफ सूची में पीछे हो गए थे। दरअसल 18 फरवरी को पीएससी की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा हुई थी। उसमें से चयनित हुए अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का माैका मिला था। मुख्य परीक्षा पिछले साल ही जुलाई में हुई थी।

टॉप-10 अभ्यर्थी और उनके अंक : हर्षल चौधरी 1023, रचना शर्मा 976, राजनंदिनी 975, मयंक तिवारी 974, रवींद्र परमार 967, किरण अंजाना 963, शिवाली सिंह 956, भाग्या त्रिपाठी 954, कृतिका भीमावद 954, लक्ष्मीनारायण गर्ग 952 अंक।

ये हिस्से शीतलहर की चपेट में
स्थानीय मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार, सोमवार को प्रदेश के ग्वालियर, चंबल, सागर, उज्जैन, व इंदौर संभागों के जिलों में कहीं-कहीं शीतलहर चलने की आशंका है। इसके अलावा ग्वालियर, चंबल, सागर, भोपाल, उज्जैन और इंदौर संभागों के जिलों में कुछ स्थानों पर ठंड का प्रभाव दूसरे स्थानों की तुलना ज्यादा रहेगा। वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि ग्वालियर, चंबल, सागर संभागों के जिलों में कहीं-कहीं पाला पड़ने की उम्मीद है।

अमेरिका चौथा बड़ा स्टील उत्पादक देश
दुनियाभर के देशों ने पिछले साल 1,808.6 मिलियन टन स्टील का प्रोडक्शन किया। यह 2017 के 1,729.8 मिलियन टन से 4.6% ज्यादा है। 2018 में कुल स्टील उत्पादन में चीन का शेयर 51.3% रहा। 2017 में 50.3% था।

स्टील उत्पादन पर रिपोर्ट जारी करने वाला वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन दुनियाभर की स्टील कंपनियों, राष्ट्रीय-क्षेत्रीय संगठनों और स्टील रिसर्च संस्थानों का संघ है। इसमें 160 स्टील उत्पादक शामिल हैं। इसके सदस्य देश दुनिया की 85% स्टील का उत्पादन करते हैं।

Thursday, January 17, 2019

वो देश जिसकी पहचान है- कम्पीटिशन

माल्टा की राजधानी वैलेटा की गलियों में निकल जाएं, तो हर शख़्स दूसरे से होड़ लगाता मालूम होगा. माल्टा की संस्कृति की इस ख़ूबी को 'पीका' कहते हैं. माल्टा की ज़बान के इस शब्द का मतलब है पड़ोसी से प्रतिद्वंदिता. ये पीका शब्द ही माल्टा की जीवनशैली की बुनियाद है.

भूमध्य सागर के क़रीब स्थित छोटे से देश माल्टा ने अपने लंबे इतिहास में उथल-पुथल के कई दौर देखे हैं. कभी ये अरबों के अधीन रहा, तो कभी यूरोपीय तानाशाहों के. कभी इस्लाम के असर से प्रभावित हुआ तो कभी माल्टा ईसाई धर्म प्रचारकों के आगोश में.

तमाम उतार-चढ़ावों में अगर कभी ख़त्म नहीं हुई, तो वो थी माल्टा के लोगों की पीका यानी एक-दूसरे से होड़ लगाने की भावना.

माल्टा यूनिवर्सिटी में विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रोफ़ेसर जॉर्ज कसार कहते हैं, 'पीका वो भावना है, जो माल्टा के लोगों को अपने क़रीबी लोगों को पछाड़ने के लिए प्रेरित करती है.'

माल्टा में ये परंपरा आम तौर पर दो अलग-अलग कुल गुरुओं या संतों के अनुयायियों के बीच होड़ के तौर पर पलती आई है.

इसे ऐसे समझें कि कोई कबीर का भक्त है, तो कोई संत रविदास का और दोनों के भक्त ख़ुद को बेहतर दिखाने की होड़ लगाते हैं.

माल्टा में हर मुहल्ले के अलग संत या कुल गुरू होते हैं. यहां पर संतों को पूजने की परंपरा को त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है. इस दौरान सजावट से लेकर जश्न के दूसरे पहलुओं में आगे निकलने की होड़ लगती है. कई बार तो ये मुक़ाबला इतना आक्रामक हो जाता है कि बात गाली-गलौज और हिंसा तक जा पहुंचती है.

जॉर्ज कसार कहते हैं कि पीका की भावना के चलते ही माल्टा के लोगों ने राजधानी वेलेटा में 1958 में एक पुराने गिरजाघर कार्मेलाइट बैसिलिका को ध्वस्त करके उसकी जगह चर्च की और ज़्यादा शानदार इमारत बनाई थी, ताकि पड़ोस में स्थित एंग्लिकन कैथेड्रल को नीचा दिखा सकें.

इसी होड़ का नतीजा था कि पिछले साल अगस्त में एक परेड के दौरान एक शख़्स के सिर पर किसी ने गमला दे मारा था. इसी घटना के दो हफ़्ते बाद ही एक और परेड के दौरान दो पादरियों ने एक-दूसरे को जमकर भद्दी-भद्दी गालियां दी थीं. बात सिर्फ़ इतनी थी कि जश्न के दौरान सजाई गई वर्जिन मेरी की अपनी-अपनी मूर्तियों को दोनों पादरी बेहतर और दूसरे को पूरे माल्टा में सबसे बदसूरत बता रहे थे.

हर साल माल्टा में फेस्टा सीज़न आता है. जब हर गांव अपने कुल गुरू की याद में जश्न आयोजित करता है. फेस्टा सीज़न जून से सितंबर के बीच आता है. इस दौरान माल्टा के लोगों का भूमध्य सागरीय गर्म ख़ून बहुत उबाल मारता है. जश्न के दौरान दूसरों को नीचा दिखाने के लिए गाली-गलौज तक हो जाती है. 2004 में तो हालात इतने बिगड़ गए थे कि फेस्टा सीज़न को रद्द करना पड़ा था, ताकि हिंसा न भड़के.

साल दर साल हर संत के अनुयायी जश्न में ख़ुद को बेहतर साबित करने के लिए ख़ूब पैसे बहाते हैं. ये परंपरा मध्यकालीन है और येरूशलम से आए कैथोलिक योद्धाओं 'नाइट्स हॉस्पिटालर' के साथ माल्टा पहुंची थी. इन योद्धाओं ने माल्टा पर 1530 से लेकर अगली तीन सदी तक राज किया था.

फेस्टा के दौरान झंडे लहराए जाते हैं. हाथ से बनी कलाकृतियों की नुमाइश की जाती है. भोज होता है. गहनों की प्रदर्शनी होती है.

माल्टा के अलग-अलग क़स्बों के बीच फेस्टा सीज़न में ज़बरदस्त मुक़ाबला होता है.

ऐसा ही एक क़स्बा है क़ूर्मी. इसके बाशिंदे सेंट जॉर्ज और सेंट सेबैस्टियन के अनुयायियों में बंटे हुए हैं. दोनों के बीच फेस्टा सीज़न में आगे निकलने की ख़ूब होड़ लगती है.

माल्टा में संतों को मानने की परंपरा मध्य काल से शुरू हुई थी. यहां की संस्कृति पर अरबों की छाप भी साफ़ दिखती है. इसीलिए यहां की ज़बान में अरबी शब्द ख़ूब मिलते हैं. लेकिन, माल्टा हमेशा से ही ख़ुद को यूरोपीय देश होने का दावा करता आया है. यहां पर रोमन कैथोलिक चर्च ही हावी है.

प्रोफ़ेसर जॉर्ज कसार कहते हैं कि पीका की भावना भूमध्य सागर की परंपरा का हिस्सा है. स्पेन और इटली में भी त्यौहारों के दौरान होड़ लगती है.

इटली के सिसिली द्वीप में भी गांवों के बीच ये प्रतिद्वंदिता देखने को मिलती है.

फेस्टा सीज़न के दौरान निकलने वाली परेड में संगीत के बैंड गाते-बजाते निकलते हैं. इन्हें भी एक-दूसरे से बेहतर साबित करने का मुक़ाबला होता है.

Wednesday, January 9, 2019

अनुवाद में अटका रामलला का फैसला, 29 जनवरी के बाद भी मिल सकती है तारीख पर तारीख

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का मसला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ता दिख रहा है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले की सुनवाई शुरू हुई तो कई अड़चनों के बाद इसे 29 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के द्वारा जस्टिस यूयू ललित के बेंच में होने पर सवाल उठाया तो वहीं हिंदू महासभा के वकीलों का भी कहना है कि इस मसले से जुड़े से अनुवाद हुआ है उसकी जांच होनी चाहिए.

इन दो मुख्य कारणों को देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को 29 जनवरी तक के लिए टाल दिया. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 29 जनवरी तक इस मसले पर नई बेंच का गठन किया जाएगा और दस्तावेजों के अनुवाद की पुष्टि नए रूप से की जाएगी. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज पेश किए गए उसमें कुल 18836 पेज हैं.

इसके अलावा जो भी हाई कोर्ट का फैसला है वह 4304 पेज है. मामले से जुड़े मूल दस्तावेज अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू और गुरमुखी में लिखे गए हैं. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि जिन पार्टियों ने इन दस्तावेजों का ट्रांसलेशन किया है उसकी पुष्टि होनी भी जरूरी है. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुष्टि को भी 29 जनवरी तक पूरा करने को कहा है.

आपको बता दें कि इससे पहले भी जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में आया था. तब कुल 9000 पन्नों के दस्तावेज, 90000 पन्नों में हिन्दी-अरबी-उर्दू-फारसी-संस्कृत के धार्मिक दस्तावेज थे. तब रिटायर्ड दीपक मिश्रा की बेंच के सामने सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अनुवाद करवाने की अपील की थी.

हालांकि, कई जानकारों का मानना है कि इतने अधिक संख्या में दस्तावेजों का वेरिफेकशन करना इतने कम समय में करना नामुमकिन है. क्योंकि पहले भी जब हिन्दी भाषा में अनुवाद किया गया था तो वकीलों ने अंग्रेजी में अनुवाद मांगा था. जिसके बाद यूपी सरकार को सभी दस्तावेजों को ट्रांसलेट करवाने में 4 महीने समय तक का लग गया था.

यू यू ललित का जन्म यू आर ललित के परिवार में हुआ, जो दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व एडिशनल जज और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील थे.

साल 1986 से 1992 के बीच ललित ने भारत के अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के लिए काम किया.

29 अप्रैल, 2004 को ललित को सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ वकील बना दिया गया. साल 2011 में जी एस सिंघवी और ए के गांगुली वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ललित को 2जी स्पेक्ट्रम मामलों में सीबीआई जांच के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर नियुक्त किया.

ललित इसके अलावा कई हाई प्रोफ़ाइल मामलों में भी पेश हो चुके हैं, जिनमें सलमान ख़ान वाला ब्लैक बक शिकार मामला भी शामिल है.

साथ ही वो भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में गुजरात के तत्कालीन मंत्री अमित शाह और तत्कालीन सेना प्रमुख वी के सिंह का जन्मतिथि वाला मामला भी शामिल है.

Wednesday, January 2, 2019

महलों के मालिकों को ख़रीदार क्यों नहीं मिल रहे हैं?

84 साल के रोलैंड थेनोट फ्रांस के ज्वालामुखीय क्षेत्र औवेर्गेन में बने मांटक्लैवेल के मालिक हैं. यह घर 19वीं शताब्दी का है.

सात एकड़ के पार्क के बीच 700 वर्गमीटर में बना यह घर देखने में कैसल (महल) लगता है. मगर थेनोट कहते हैं, "यह असल में कैसल नहीं है."

"इसमें दो टावर हैं, चार इमारतें हैं और एक बड़ा बग़ीचा है. इसलिए मुझे लगता है कि वास्तुकला के नज़रिये से यह कैसल जैसा दिखता है."

मांटक्लैवेल का नाम स्पेनिश फूल क्लैवेल पर रखा गया है. थेनोट की नज़रों से देखें तो यहां के शाही महलों में भी वह बात नहीं जो उनके घर में है.

वह कहते हैं, "इसमें एक आत्मा है." थेनोट के पिता स्क्रैप का कारोबार करते थे. क्लेरमांट-फेरंड में उनकी फ़ैक्ट्री थी.

पिछले क़रीब 60 साल से यह घर इसी परिवार के पास है. थेनोट कहते हैं, "मेरे पिता पूरे परिवार के लिए बड़ा घर ख़रीदना चाहते थे. एक समय यहां 12 लोग रहते थे."

थेनोट मई 1968 से यहां रह रहे हैं. वे कहते हैं, "मैं जलाने के लिए लकड़ियां लाता था. पेड़ों की कटाई-छंटाई में पिता की मदद करता था."

"हम अपनी हाउसकीपर को मैडम इरमा कहते थे. लकड़ी के फ़र्श पर घुटने के बल बैठकर उसके वैक्स करने की तस्वीर अब भी मेरे पास है."

"वह हमें फ़र्श ख़राब करने से रोकती रहती थी." मांटक्लैवेल का समृद्ध इतिहास है. 60 के दशक में फ्रेंच सिनेमा में चले 'न्यू वेव' आंदोलन में इसकी भूमिका रही है.

मशहूर फ्रांसीसी फ़िल्म डायरेक्टर फ्रांस्वा ट्रफॉट ने "दि वाइल्ड बॉय" के सेट के लिए इस कैसल को चुना था. थेनोट तब ट्रफॉट के सहायक थे.

70 के दशक में थेनोट ने इसके बेसमेंट में डिस्कोथेक खोला. उनकी बहन ने अस्तबल को एक छोटे रेस्त्रां में बदल दिया, जहां उनके दोस्त डिनर के लिए आते थे.

कुछ साल पहले बहन की मौत के बाद थेनोट अकेले रह गए. वह तंदुरुस्त हैं, रिटायर हो चुके हैं और उनके पास इस कैसल की देखरेख के लिए पैसे भी हैं.

हर रोज़ वह घर को गर्म रखने के लिए आग जलाते हैं. वह अपने मुर्गे सरकोज़ी और उसके चूजों को दाना डालते हैं. वह लॉन की घास काटते हैं और पेड़ों की छंटाई करते हैं.

इस घर से बहुत प्यार होने के बाद भी थेनोट इसे बेचना चाहते हैं. वह नहीं चाहते कि उनकी मौत के बाद उनका कैसल खंडहर में बदल जाए.

"हमने इस पर बड़ी मेहनत की है. मेरे लिए यह सोचना भी मुश्किल है कि मांटक्लैवेल को छोड़ दिया जाए और यह उसी हालत में पहुंच जाए जब मेरे पिता ने इसे ख़रीदा था."

मेरे निराश होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य इस कैसल को रखना नहीं चाहता."

"दूसरी वजह यह है कि मैं बूढ़ा हो गया हूं और इसकी देखरेख के सारे काम नहीं कर सकता."

"तीसरी वजह यह है कि अब मैं रिटायरमेंट पेंशन पर गुज़ारा कर रहा हूं. देखरेख के बिना यह खंडहर में बदल जाए यह मुझसे देखा नहीं जाएगा."

पारिवारिक संपत्ति बेचने का फ़ैसला बहुत भावनात्मक होता है.

ड्यूक यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर स्कॉट ह्यूटेल कहते हैं, "हमारी यादें अक्सर कुछ जगहों से जुड़ जाती हैं."

隐瞒病症致3人感染114人隔离 浙江一男子被移送起诉

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