Monday, January 28, 2019

मंडला के हर्षल टॉपर, दूसरे-तीसरे नंबर पर भोपाल की रचना और राजनंदिनी, टॉप-10 में छह छात्राएं

मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा-2018 का फाइनल रिजल्ट रविवार को जारी हो गया। इसमें 298 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। अंक सूची के आधार पर टॉप पर मंडला के हर्षल चौधरी रहे। उन्हें 1023 अंक मिले। इस बार टॉप-10 में 6 महिला अभ्यर्थियों ने जगह बनाई।

इनमें भोपाल की दो रचना शर्मा 976 अंक और राजनंदिनी शर्मा 975 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। आयोग आरक्षण व अन्य गणना के आधार पर चयन और मेरिट सूची एक-दो दिन में जारी करेगा। कुल 298 पदों के लिए 31 दिसंबर से 23 जनवरी तक इंटरव्यू हुए थे। इसमें 895 अभ्यर्थी शामिल हुए।

एमपी पीएससी राज्य सेवा मुख्य परीक्षा पिछले साल जुलाई माह में हुई थी। अलग-अलग वजह से  परीक्षा से पहले 365 अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया था। ये वे छात्र हैं जो रिजल्ट में आपत्ति के बाद हुए बदलाव के चलते कट ऑफ सूची में पीछे हो गए थे। दरअसल 18 फरवरी को पीएससी की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा हुई थी। उसमें से चयनित हुए अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने का माैका मिला था। मुख्य परीक्षा पिछले साल ही जुलाई में हुई थी।

टॉप-10 अभ्यर्थी और उनके अंक : हर्षल चौधरी 1023, रचना शर्मा 976, राजनंदिनी 975, मयंक तिवारी 974, रवींद्र परमार 967, किरण अंजाना 963, शिवाली सिंह 956, भाग्या त्रिपाठी 954, कृतिका भीमावद 954, लक्ष्मीनारायण गर्ग 952 अंक।

ये हिस्से शीतलहर की चपेट में
स्थानीय मौसम विज्ञान केन्द्र के अनुसार, सोमवार को प्रदेश के ग्वालियर, चंबल, सागर, उज्जैन, व इंदौर संभागों के जिलों में कहीं-कहीं शीतलहर चलने की आशंका है। इसके अलावा ग्वालियर, चंबल, सागर, भोपाल, उज्जैन और इंदौर संभागों के जिलों में कुछ स्थानों पर ठंड का प्रभाव दूसरे स्थानों की तुलना ज्यादा रहेगा। वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि ग्वालियर, चंबल, सागर संभागों के जिलों में कहीं-कहीं पाला पड़ने की उम्मीद है।

अमेरिका चौथा बड़ा स्टील उत्पादक देश
दुनियाभर के देशों ने पिछले साल 1,808.6 मिलियन टन स्टील का प्रोडक्शन किया। यह 2017 के 1,729.8 मिलियन टन से 4.6% ज्यादा है। 2018 में कुल स्टील उत्पादन में चीन का शेयर 51.3% रहा। 2017 में 50.3% था।

स्टील उत्पादन पर रिपोर्ट जारी करने वाला वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन दुनियाभर की स्टील कंपनियों, राष्ट्रीय-क्षेत्रीय संगठनों और स्टील रिसर्च संस्थानों का संघ है। इसमें 160 स्टील उत्पादक शामिल हैं। इसके सदस्य देश दुनिया की 85% स्टील का उत्पादन करते हैं।

Thursday, January 17, 2019

वो देश जिसकी पहचान है- कम्पीटिशन

माल्टा की राजधानी वैलेटा की गलियों में निकल जाएं, तो हर शख़्स दूसरे से होड़ लगाता मालूम होगा. माल्टा की संस्कृति की इस ख़ूबी को 'पीका' कहते हैं. माल्टा की ज़बान के इस शब्द का मतलब है पड़ोसी से प्रतिद्वंदिता. ये पीका शब्द ही माल्टा की जीवनशैली की बुनियाद है.

भूमध्य सागर के क़रीब स्थित छोटे से देश माल्टा ने अपने लंबे इतिहास में उथल-पुथल के कई दौर देखे हैं. कभी ये अरबों के अधीन रहा, तो कभी यूरोपीय तानाशाहों के. कभी इस्लाम के असर से प्रभावित हुआ तो कभी माल्टा ईसाई धर्म प्रचारकों के आगोश में.

तमाम उतार-चढ़ावों में अगर कभी ख़त्म नहीं हुई, तो वो थी माल्टा के लोगों की पीका यानी एक-दूसरे से होड़ लगाने की भावना.

माल्टा यूनिवर्सिटी में विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रोफ़ेसर जॉर्ज कसार कहते हैं, 'पीका वो भावना है, जो माल्टा के लोगों को अपने क़रीबी लोगों को पछाड़ने के लिए प्रेरित करती है.'

माल्टा में ये परंपरा आम तौर पर दो अलग-अलग कुल गुरुओं या संतों के अनुयायियों के बीच होड़ के तौर पर पलती आई है.

इसे ऐसे समझें कि कोई कबीर का भक्त है, तो कोई संत रविदास का और दोनों के भक्त ख़ुद को बेहतर दिखाने की होड़ लगाते हैं.

माल्टा में हर मुहल्ले के अलग संत या कुल गुरू होते हैं. यहां पर संतों को पूजने की परंपरा को त्यौहार के तौर पर मनाया जाता है. इस दौरान सजावट से लेकर जश्न के दूसरे पहलुओं में आगे निकलने की होड़ लगती है. कई बार तो ये मुक़ाबला इतना आक्रामक हो जाता है कि बात गाली-गलौज और हिंसा तक जा पहुंचती है.

जॉर्ज कसार कहते हैं कि पीका की भावना के चलते ही माल्टा के लोगों ने राजधानी वेलेटा में 1958 में एक पुराने गिरजाघर कार्मेलाइट बैसिलिका को ध्वस्त करके उसकी जगह चर्च की और ज़्यादा शानदार इमारत बनाई थी, ताकि पड़ोस में स्थित एंग्लिकन कैथेड्रल को नीचा दिखा सकें.

इसी होड़ का नतीजा था कि पिछले साल अगस्त में एक परेड के दौरान एक शख़्स के सिर पर किसी ने गमला दे मारा था. इसी घटना के दो हफ़्ते बाद ही एक और परेड के दौरान दो पादरियों ने एक-दूसरे को जमकर भद्दी-भद्दी गालियां दी थीं. बात सिर्फ़ इतनी थी कि जश्न के दौरान सजाई गई वर्जिन मेरी की अपनी-अपनी मूर्तियों को दोनों पादरी बेहतर और दूसरे को पूरे माल्टा में सबसे बदसूरत बता रहे थे.

हर साल माल्टा में फेस्टा सीज़न आता है. जब हर गांव अपने कुल गुरू की याद में जश्न आयोजित करता है. फेस्टा सीज़न जून से सितंबर के बीच आता है. इस दौरान माल्टा के लोगों का भूमध्य सागरीय गर्म ख़ून बहुत उबाल मारता है. जश्न के दौरान दूसरों को नीचा दिखाने के लिए गाली-गलौज तक हो जाती है. 2004 में तो हालात इतने बिगड़ गए थे कि फेस्टा सीज़न को रद्द करना पड़ा था, ताकि हिंसा न भड़के.

साल दर साल हर संत के अनुयायी जश्न में ख़ुद को बेहतर साबित करने के लिए ख़ूब पैसे बहाते हैं. ये परंपरा मध्यकालीन है और येरूशलम से आए कैथोलिक योद्धाओं 'नाइट्स हॉस्पिटालर' के साथ माल्टा पहुंची थी. इन योद्धाओं ने माल्टा पर 1530 से लेकर अगली तीन सदी तक राज किया था.

फेस्टा के दौरान झंडे लहराए जाते हैं. हाथ से बनी कलाकृतियों की नुमाइश की जाती है. भोज होता है. गहनों की प्रदर्शनी होती है.

माल्टा के अलग-अलग क़स्बों के बीच फेस्टा सीज़न में ज़बरदस्त मुक़ाबला होता है.

ऐसा ही एक क़स्बा है क़ूर्मी. इसके बाशिंदे सेंट जॉर्ज और सेंट सेबैस्टियन के अनुयायियों में बंटे हुए हैं. दोनों के बीच फेस्टा सीज़न में आगे निकलने की ख़ूब होड़ लगती है.

माल्टा में संतों को मानने की परंपरा मध्य काल से शुरू हुई थी. यहां की संस्कृति पर अरबों की छाप भी साफ़ दिखती है. इसीलिए यहां की ज़बान में अरबी शब्द ख़ूब मिलते हैं. लेकिन, माल्टा हमेशा से ही ख़ुद को यूरोपीय देश होने का दावा करता आया है. यहां पर रोमन कैथोलिक चर्च ही हावी है.

प्रोफ़ेसर जॉर्ज कसार कहते हैं कि पीका की भावना भूमध्य सागर की परंपरा का हिस्सा है. स्पेन और इटली में भी त्यौहारों के दौरान होड़ लगती है.

इटली के सिसिली द्वीप में भी गांवों के बीच ये प्रतिद्वंदिता देखने को मिलती है.

फेस्टा सीज़न के दौरान निकलने वाली परेड में संगीत के बैंड गाते-बजाते निकलते हैं. इन्हें भी एक-दूसरे से बेहतर साबित करने का मुक़ाबला होता है.

Wednesday, January 9, 2019

अनुवाद में अटका रामलला का फैसला, 29 जनवरी के बाद भी मिल सकती है तारीख पर तारीख

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का मसला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ता दिख रहा है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले की सुनवाई शुरू हुई तो कई अड़चनों के बाद इसे 29 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के द्वारा जस्टिस यूयू ललित के बेंच में होने पर सवाल उठाया तो वहीं हिंदू महासभा के वकीलों का भी कहना है कि इस मसले से जुड़े से अनुवाद हुआ है उसकी जांच होनी चाहिए.

इन दो मुख्य कारणों को देखते हुए ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले को 29 जनवरी तक के लिए टाल दिया. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 29 जनवरी तक इस मसले पर नई बेंच का गठन किया जाएगा और दस्तावेजों के अनुवाद की पुष्टि नए रूप से की जाएगी. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जो दस्तावेज पेश किए गए उसमें कुल 18836 पेज हैं.

इसके अलावा जो भी हाई कोर्ट का फैसला है वह 4304 पेज है. मामले से जुड़े मूल दस्तावेज अरबी, फारसी, संस्कृत, उर्दू और गुरमुखी में लिखे गए हैं. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि जिन पार्टियों ने इन दस्तावेजों का ट्रांसलेशन किया है उसकी पुष्टि होनी भी जरूरी है. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुष्टि को भी 29 जनवरी तक पूरा करने को कहा है.

आपको बता दें कि इससे पहले भी जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में आया था. तब कुल 9000 पन्नों के दस्तावेज, 90000 पन्नों में हिन्दी-अरबी-उर्दू-फारसी-संस्कृत के धार्मिक दस्तावेज थे. तब रिटायर्ड दीपक मिश्रा की बेंच के सामने सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अनुवाद करवाने की अपील की थी.

हालांकि, कई जानकारों का मानना है कि इतने अधिक संख्या में दस्तावेजों का वेरिफेकशन करना इतने कम समय में करना नामुमकिन है. क्योंकि पहले भी जब हिन्दी भाषा में अनुवाद किया गया था तो वकीलों ने अंग्रेजी में अनुवाद मांगा था. जिसके बाद यूपी सरकार को सभी दस्तावेजों को ट्रांसलेट करवाने में 4 महीने समय तक का लग गया था.

यू यू ललित का जन्म यू आर ललित के परिवार में हुआ, जो दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व एडिशनल जज और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वरिष्ठ वकील थे.

साल 1986 से 1992 के बीच ललित ने भारत के अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी के लिए काम किया.

29 अप्रैल, 2004 को ललित को सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ वकील बना दिया गया. साल 2011 में जी एस सिंघवी और ए के गांगुली वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ललित को 2जी स्पेक्ट्रम मामलों में सीबीआई जांच के लिए स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर नियुक्त किया.

ललित इसके अलावा कई हाई प्रोफ़ाइल मामलों में भी पेश हो चुके हैं, जिनमें सलमान ख़ान वाला ब्लैक बक शिकार मामला भी शामिल है.

साथ ही वो भ्रष्टाचार मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में गुजरात के तत्कालीन मंत्री अमित शाह और तत्कालीन सेना प्रमुख वी के सिंह का जन्मतिथि वाला मामला भी शामिल है.

Wednesday, January 2, 2019

महलों के मालिकों को ख़रीदार क्यों नहीं मिल रहे हैं?

84 साल के रोलैंड थेनोट फ्रांस के ज्वालामुखीय क्षेत्र औवेर्गेन में बने मांटक्लैवेल के मालिक हैं. यह घर 19वीं शताब्दी का है.

सात एकड़ के पार्क के बीच 700 वर्गमीटर में बना यह घर देखने में कैसल (महल) लगता है. मगर थेनोट कहते हैं, "यह असल में कैसल नहीं है."

"इसमें दो टावर हैं, चार इमारतें हैं और एक बड़ा बग़ीचा है. इसलिए मुझे लगता है कि वास्तुकला के नज़रिये से यह कैसल जैसा दिखता है."

मांटक्लैवेल का नाम स्पेनिश फूल क्लैवेल पर रखा गया है. थेनोट की नज़रों से देखें तो यहां के शाही महलों में भी वह बात नहीं जो उनके घर में है.

वह कहते हैं, "इसमें एक आत्मा है." थेनोट के पिता स्क्रैप का कारोबार करते थे. क्लेरमांट-फेरंड में उनकी फ़ैक्ट्री थी.

पिछले क़रीब 60 साल से यह घर इसी परिवार के पास है. थेनोट कहते हैं, "मेरे पिता पूरे परिवार के लिए बड़ा घर ख़रीदना चाहते थे. एक समय यहां 12 लोग रहते थे."

थेनोट मई 1968 से यहां रह रहे हैं. वे कहते हैं, "मैं जलाने के लिए लकड़ियां लाता था. पेड़ों की कटाई-छंटाई में पिता की मदद करता था."

"हम अपनी हाउसकीपर को मैडम इरमा कहते थे. लकड़ी के फ़र्श पर घुटने के बल बैठकर उसके वैक्स करने की तस्वीर अब भी मेरे पास है."

"वह हमें फ़र्श ख़राब करने से रोकती रहती थी." मांटक्लैवेल का समृद्ध इतिहास है. 60 के दशक में फ्रेंच सिनेमा में चले 'न्यू वेव' आंदोलन में इसकी भूमिका रही है.

मशहूर फ्रांसीसी फ़िल्म डायरेक्टर फ्रांस्वा ट्रफॉट ने "दि वाइल्ड बॉय" के सेट के लिए इस कैसल को चुना था. थेनोट तब ट्रफॉट के सहायक थे.

70 के दशक में थेनोट ने इसके बेसमेंट में डिस्कोथेक खोला. उनकी बहन ने अस्तबल को एक छोटे रेस्त्रां में बदल दिया, जहां उनके दोस्त डिनर के लिए आते थे.

कुछ साल पहले बहन की मौत के बाद थेनोट अकेले रह गए. वह तंदुरुस्त हैं, रिटायर हो चुके हैं और उनके पास इस कैसल की देखरेख के लिए पैसे भी हैं.

हर रोज़ वह घर को गर्म रखने के लिए आग जलाते हैं. वह अपने मुर्गे सरकोज़ी और उसके चूजों को दाना डालते हैं. वह लॉन की घास काटते हैं और पेड़ों की छंटाई करते हैं.

इस घर से बहुत प्यार होने के बाद भी थेनोट इसे बेचना चाहते हैं. वह नहीं चाहते कि उनकी मौत के बाद उनका कैसल खंडहर में बदल जाए.

"हमने इस पर बड़ी मेहनत की है. मेरे लिए यह सोचना भी मुश्किल है कि मांटक्लैवेल को छोड़ दिया जाए और यह उसी हालत में पहुंच जाए जब मेरे पिता ने इसे ख़रीदा था."

मेरे निराश होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य इस कैसल को रखना नहीं चाहता."

"दूसरी वजह यह है कि मैं बूढ़ा हो गया हूं और इसकी देखरेख के सारे काम नहीं कर सकता."

"तीसरी वजह यह है कि अब मैं रिटायरमेंट पेंशन पर गुज़ारा कर रहा हूं. देखरेख के बिना यह खंडहर में बदल जाए यह मुझसे देखा नहीं जाएगा."

पारिवारिक संपत्ति बेचने का फ़ैसला बहुत भावनात्मक होता है.

ड्यूक यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर स्कॉट ह्यूटेल कहते हैं, "हमारी यादें अक्सर कुछ जगहों से जुड़ जाती हैं."

Friday, December 28, 2018

1000 करोड़ रु. की फेंटानिल ड्रग्स के साथ चार गिरफ्तार, इसकी 2 मिलीग्राम मात्रा ले सकती है जान

महाराष्ट्र पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने बुधवार को वाकोला इलाके से फेंटानिल नाम की प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 1,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। फेंटानिल इतनी खतरनाक है कि इसकी महज 0.002 ग्राम (2 मिलीग्राम) मात्रा ही किसी की जान ले सकती है।

ड्रग्स को मैक्सिको भेजा जाना था
मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल के डीसीपी शिवदीप लांडे ने बताया कि फेंटानिल ड्रग्स को मुंबई से मैक्सिको भेजा जाना था। वहां इसे कौन खरीदने वाला था और इतनी बड़ी मात्रा में किसने फेंटानिल को तैयार किया, यह जांच का विषय है। आरोपियों के नाम सलीम डोला, घनश्याम सरोज, भाई चंद्रमणि और संदीप तिवारी हैं। ये लोग दलालों के संपर्क में भी थे।

आरोपियों के पास से ड्रग्स से भरे चार ड्रम जब्त हुए हैं। कोर्ट ने आरोपियों को 1 जनवरी तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है। डोला को एक बार पहले भी राजस्व खुफिया निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

आरोपियों ने कोर्ट में दावा किया कि उनके पास से जब्त किया गया पदार्थ फेंटानिल नहीं है। साथ ही उनके पास इसकी खरीदी के दस्तावेज भी हैं। फेंटानिल का इस्तेमाल एनेस्थीसिया और कैंसर के इलाज में किया जाता है। नशे के लिए इसे कोकीन और हेरोइन में मिलाया जाता है।

ड्रग की जरा सी मात्रा ले सकती है जान
इससे पहले डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने इसी साल 26 सितंबर को इंदौर में 110 करोड़ से ज्यादा कीमत की फेंटानिल जब्त की थी। मैक्सिको के जार्ज सालिस के साथ केमिकल पर रिसर्च करने वाले डॉ. मोहम्मद सादिक और मनु गुप्ता नाम के तीन लोग पकड़े गए थे। तब डीआरआई के अधिकारियों ने पहली बार इस ड्रग की जब्ती का दावा किया था। यह ड्रग नशे के लिए 0.001 ग्राम (एक मिलीग्राम) ली जाती है। ओवरडोज होते ही मौत हो सकती है। यानी इस ड्रग की 0.002 ग्राम (2 मिलीग्राम) मात्रा जान ले सकती है।

खतरे को देखते हुए डीआरआई ने रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले डीआरडीओ (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) को भी कार्रवाई में शामिल किया था, क्योंकि किसी भी संस्थान के पास इसका सैंपल लेने और इसकी जांच करने के संसाधन ही नहीं हैं। यह इतनी घातक है कि इसे बाहर भी नहीं भेजा जा सका।

अमेरिका में एक साल में गई थी 29 हजार लोगों की जान
फेंटानिल को अमेरिका में सबसे खतरनाक ड्रग माना जाता है। अमेरिका में 2016 में इसके ओवरडोज से 20 हजार और 2017 में 29 हजार लोगों की जान गई थी। यह मॉर्फीन से 100 गुना और अन्य किसी सामान्य ड्रग से 10 हजार गुना ज्यादा प्रभावी है। इसका इस्तेमाल कैंसर या मौत के कगार पर पहुंच चुके मरीजों का दर्द कम करने के लिए किया जाता है। व्यावसायिक तौर पर (बेचने के लिए) किसी को लाइसेंस भी मिलता है तो वह केवल एक समय 0.1 ग्राम ही रख सकता है।

Wednesday, December 19, 2018

राहुल के वायरल वीडियो पर स्मृति ने कहा- उन्हें सपना दिखाने के लिए भी ट्यूशन लेनी पड़ती है

दो राज्यों में कर्जमाफी को लेकर हुई कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने  बुधवार को राहुल पर चुटकी ली। ईरानी ने राहुल का वीडियो शेयर करते हुए कहा- आजकल सपना दिखाने के लिए भी ट्यूशन लेनी पड़ती है?

दरअसल, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार द्वारा कर्जमाफी के बाद राहुल ने संसद में मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई मुद्दों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जब तक देश के किसान का कर्ज माफ नहीं होता, वे मोदी को सोने नहीं देंगे।

कॉन्फ्रेंस का शुरुआती वीडियो हो रहा वायरल

इस कॉन्फ्रेंस के वीडियो का शुरुआती हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें राहुल गांधी के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद नजर आ रहे हैं। राहुल नेताओं से बात करते दिख रहे हैं। वीडियो में अहमद पटेल और ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राहुल को कुछ सलाह देते दिख रहे हैं। सिंधिया राहुल ने कह रह हैं, "जो मोदी नहीं कर पाए, वो मैं करके दिखा चुका हूं।'' इस पर राहुल सहमति का इशारा कर रहे हैं।

सफल महिला निर्देशक और अभिनेत्री पेनी मार्शल का सोमवार को निधन हो गया। वह 75 साल की थी। उनकी मृत्यु मधुमेह संबंधी जटिलताओं के चलते हुई। पेनी के पब्लिसिस्ट ने उनकी मौत की जानकारी देते हुए बताया कि उनका निधन सोमवार को उनके हॉलीवुड हिल्स स्थित घर में हुआ।

पेनी ने 'बिग' और 'अ लीग ऑफ देयर ओन' जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन किया। पेनी को टीवी सीरीज 'लार्वेन एंड शर्ली' में उनके काम के लिए पहचाना गया। जिसके बाद उन्होंने फिल्म निर्देशन में अपना हाथ आजमाया। निर्देशक के तौर पर पेनी की पहली फिल्म 1986 में आई 'जंपिग जैक फ्लैश' थी।

टॉम हैंक्स स्टारर फिल्म 'बिग' से पेनी ने बतौर निर्देशक बड़ा मुकाम हासिल किया था। 2004 में पेनी के नाम का स्टार हॉलीवुड के वॉक ऑफ फेम में लगाया गया। पेनी की मौत के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई स्टार्स ने सोशल मीडिया पर दुख जताया है।

Monday, November 26, 2018

रायबरेली जेल में शराब पार्टी का वीडियो वायरल, कई अधिकारी सस्पेंड

मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया था कि यूपी में अपराधी नहीं सुधरे तो उनका ठिकाना जेल होगा. मगर ये नहीं बताया था कि जेल ही अपराधियों की अय्याशगाह बन जाएगी. यूपी सरकार की नींद उड़ा देने वाला ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें साफ देखा जा सकता है कि रायबरेली जेल अपराधियों के लिए कैसे जन्नत बन गई, कैसे वहां उनका सिक्का चलता है. कैसे अपराधी तमंचे और कारतूस से जेल में खेलते हैं, कैसे वो जेल से ही लोगों को धमकियां दे रहे हैं.

वीडियो में रायबरेली की जेल का दृश्य दिखता है. जहां कत्ल के आरोपियों की महफिल सज़ी है. शराब रखी है, बढ़िया सा चखना है, कारतूस हैं, तमंचा है, मोबाइल फोन है. संगीन जुर्म में बंद इन आरोपियों की बातें सुनेंगे तो पांव के नीचे से जमीन खिसक जाएगी. वो मोबाइल से कॉल करके लोगों को धमका रहे हैं.

वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे इन अपराधियों के आगे पूरा का पूरा जेल प्रशासन नतमस्तक है. कैसे अपराधी जेल में बैठकर बोलियां लगाते थे कि जेलर दस हजार में बिकेगा, डिप्टी जेलर की कीमत पांच हजार भी बहुत है. जब जेलर बिक गया हो. डिप्टी जेलर बिक गया हो. जेल का एक एक पुलिसकर्मी बिक गया हो. तो अपराधी जेल से फोन पर अपने गवाह को धमकाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

जेल के भीतर इन अपराधियों का रसूख देखने लायक है. वे जेल के भीतर से अपना हुक्म चलाते हैं. जेल के अधिकारियों को खरीद लेते हैं. दरअसल, ये वीडियो रायबरेली जेल की बैरक नंबर 10 में बंद संगीन जुर्म के आरोपियों का है. जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे जेल के भीतर ये शातिर अपराधी हथियारों से खेलते हैं. कैसे शराब सिगरेट की पार्टी करते हैं. कैसे ये पुलिसवालों को खरीदते हैं.

अब आपको बताते हैं कि ये आरोपी हैं कौन. पार्टी का मुख्य आयोजक अंशू दीक्षित है, जो पेशेवर अपराधी है. हाल ही में लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र नेता विनोद त्रिपाठी की हत्या के मामले में उसका नाम सामने आय़ा था. उसके अलावा वीडियो में अजीत चौबे, सिंगार सिंह, सोहराब और निखिल सोनकर नज़र आ रहे हैं.

इन सब पर सीतापुर, लखीमपुर, लखनऊ, हरदोई, प्रतापगढ़ और इलाहाबाद में लूट और हत्या के कई मामले दर्ज हैं. मतलब ये कि ये कोई ऐरे गैरे नहीं, बल्कि खूंखार अपराधी हैं.

वीजियो में ये जिस अपराधी राम चंदर तिवारी की बात कर रहे हैं. वो इस जेल का डिप्टी जेलर हैं. ये जिस जेलर को पैसे देने की बात कर रहे हैं, उसका नाम गोविंद वर्मा है. और बाकी लोगों से जो ये सामान मंगवाने की बात कर रहे हैं, उनमें जेल का मुख्य वार्डन लालता प्रसाद और वार्डन शिवमंगल सिंह शामिल है.

ये वीडियो सामने आया, वायरल हुआ तो पुलिस की नींद उड़ गई. आनन फानन में कार्रवाई का दौर शुरु हुआ. डीएम ने छापा मारा, तो मोबाइल फोन, तमंचे, शराब की बोतलें, सिगरेट माचिस, सब बरामद हुआ. डीआईजी जेल उमेश कुमार खुद जांच के लिए पहुंचे. जांच में आरोप सच साबित हुए और फिर शुरु हुआ कार्रवाई का दौर.

कार्रवाई के नाम पर एसएसपी, जेलर और डिप्टी जेलर समेत 6 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया. पुलिस वालों पर कार्रवाई हुई. आरोपियों को दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया. मगर जिस तरह से जेल की ये तस्वीरें सामने आई हैं, उससे साबित होता है कि बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी जैसे अपराधी की हत्या हो जाने के बाद भी यूपी पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया.

अब कार्रवाई भले ही हो गई है, मगर इस वीडियो ने बता दिया कि यूपी में सरकार चाहे जिसकी हो, अगर अपराधियों का रसूख है, तो यूपी में जेल भी जन्नत हो जाया करती है.

隐瞒病症致3人感染114人隔离 浙江一男子被移送起诉

  中新网台州4月10日电 欧盟财长们已 色情性&肛交集合 同意向遭受新冠 色情性&肛交集合 病毒大流行打击的欧洲国家提供 色情性&肛交集合 5000亿欧元 色情性&肛交集合 (4400亿英镑;  色情性&肛交集合 5460亿美元) 色情性&肛交集合 的救助。 法国财 色情...